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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 223
 
 
श्लोक  2.9.223 
मलय - पर्वते कैल अगस्त्य - वन्दन ।
कन्या - कुमारी ताहाँ कैल दरशन ॥223॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद श्री चैतन्य महाप्रभु मलय पर्वत गए और अगस्त्य मुनि की पूजा की। इसके बाद वे कन्याकुमारी [केप कोमोरिन] गए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu then went to the Malaya Mountains and paid obeisance to sage Agastya. He then visited a place called Kanyakumari (Cape Camorin).
तात्पर्य
केरल से प्रारंभ होकर केप कॉमरिन तक फैली दक्षिण भारत की पर्वत श्रृंखला को मलय-पर्वत कहा जाता है। अगस्त्य के विषय में चार मत हैं: (1) तंजावुर जिले में अगस्त्यमपल्ली गाँव में अगस्त्य मुनि का एक मंदिर है। (2) शिव-गिरी नामक एक पहाड़ी पर भगवान स्कंद का एक मंदिर है, और कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना अगस्त्य मुनि ने की थी। (3) कुछ लोगों का कहना है कि केप कॉमरिन के पास की पहाड़ी को पठिया के नाम से जाना जाता है, जो अगस्त्य मुनि के निवास के रूप में काम करती थी। (4) अगस्त्य-मलय के नाम से एक स्थान है, जो ताम्रपर्णी नदी के दोनों किनारों पर पहाड़ियों की एक श्रृंखला है। केप कॉमरिन को कन्या-कुमारी के नाम से भी जाना जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)