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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 222
 
 
श्लोक  2.9.222 
चाम्ता पुरे आसि’ देखि’ श्री - राम - लक्ष्मण ।
श्री - वैकुण्ठे आसि’ कैल विष्णु दरशन ॥222॥
 
 
अनुवाद
बाद में भगवान चंपापुर गए, जहाँ उन्होंने भगवान रामचंद्र और लक्ष्मण के विग्रहों के दर्शन किए। फिर वे श्री वैकुंठ गए और वहाँ भगवान विष्णु के मंदिर के दर्शन किए।
 
Later, Mahaprabhu went to Chamtapura, where he saw the idols of Sri Ramachandra and Lakshmana. He then went to Sri Vaikuntha and saw the temple of Lord Vishnu.
तात्पर्य
चामतापुरा (जिसे कभी-कभी चेंगन्नूर भी कहा जाता है) केरल राज्य में स्थित है। वहाँ भगवान रामचंद्र और लक्ष्मण का एक मंदिर स्थित है। श्री वैकुंठ—आल्वार तिरुनगरई से लगभग चार मील उत्तर और तिरुनेलवेली से सोलह मील दक्षिण-पूर्व में स्थित है—ताम्रपर्णी नदी के किनारे पर स्थित है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)