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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 219
 
 
श्लोक  2.9.219 
ताम्रपर्णी स्नान क रि’ ताम्रपर्णी - तीरे ।
नय त्रिपति दे खि’ बुले कुतूहले ॥219॥
 
 
अनुवाद
ताम्रपर्णी नदी के तट पर, नयात्रिपाटी में भगवान विष्णु के नौ मंदिर थे, और नदी में स्नान करने के बाद, भगवान चैतन्य महाप्रभु ने बड़ी जिज्ञासा से विग्रहों को देखा और आगे चले गए।
 
At Nayatripati, on the banks of the Tamraparni River, there were nine temples dedicated to Lord Vishnu. After bathing in the river, Mahaprabhu eagerly observed the idols and wandered around.
तात्पर्य
नौ विष्णु मंदिर जो नाया-त्रिपति (नव-तिरुपति) के रूप में जाने जाते हैं वे आलवार तिरुनगरी में और उसके आसपास स्थित हैं। यह तिरुनेलवेली से लगभग सत्रह मील दक्षिण-पूर्व में स्थित एक शहर है। मंदिरों के सभी देवता सालाना उत्सव के दौरान शहर में एक साथ एकत्रित होते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)