इस क्षेत्र में चोबीस अलग-अलग पवित्र स्थान हैं, जिनमें से एक धनूष-तीर्थ है, जो रामेश्वर से लगभग बारह मील दक्षिण-पूर्व में स्थित है. यह दक्षिणी रेलवे के अंतिम स्टेशन के पास है, जो रामनाड नामक स्टेशन है. ऐसा कहा जाता है कि यहाँ, रावण के छोटे भाई विभीषण के अनुरोध पर, भगवान रामचंद्र अपनी राजधानी लौटते समय अपने धनुष से लंका तक के पुल को नष्ट कर दिया था. यह भी कहा जाता है कि जो धनूष-तीर्थ का दौरा करता है वो जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है, और जो वहाँ स्नान करता है उसे अग्निष्टोम नामक यज्ञ करने के सभी फल प्राप्त होते हैं.
