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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  2.9.198 
दुर्वशने रघुनाथे कैल दरशन ।
महेन्द्र - शैले परशुरामेर कैल वन्दन ॥198॥
 
 
अनुवाद
दुर्वासन में श्री चैतन्य महाप्रभु ने भगवान रामचन्द्र के मंदिर में दर्शन किये और महेन्द्रशैल नामक पहाड़ी पर उन्होंने भगवान परशुराम के दर्शन किये।
 
In Durvashana, Sri Chaitanya Mahaprabhu visited the temple of Lord Ramachandra. Similarly, on the mountain Mahendra-Shail, he saw Lord Parashurama.
तात्पर्य
दुर्वासाण या दरभस्यायन (जिसे अब तिरुप्पुल्लानी के नाम से जाना जाता है), जो रामनाद से सात मील पूर्व में है, में भगवान रामचंद्र का एक मंदिर है। महेंद्र-शैला नामक पहाड़ी तिरुनेलवेली के पास है, और इस पहाड़ी के अंत में एक शहर है जिसे तिरुचेंदूर के नाम से जाना जाता है। महेंद्र-शैला के पश्चिम में त्रिबांगकुरा का क्षेत्र है। रामायण में महेंद्र-शैला का उल्लेख है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)