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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  2.9.174 
परमानन्द पुरी तबे चलिला नीलाचले ।
महाप्रभु चलि चलि आइला श्री - शैले ॥174॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार परमानंद पुरी ने जगन्नाथ पुरी की ओर चलना शुरू किया, और श्री चैतन्य महाप्रभु ने श्री शैल की ओर चलना शुरू किया।
 
In this way Paramananda Puri went to Jagannath Puri, and Sri Chaitanya Mahaprabhu proceeded towards Srisailam.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर टिप्पणी करते हैं, "कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा किस श्री शैल की ओर संकेत किया जा रहा है, यह स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आता है। इस क्षेत्र में मल्लिकार्जुन का कोई मंदिर नहीं है क्योंकि धारवाड़ जिले में स्थित श्री शैल संभवतः वहां नहीं हो सकता है। वह श्री शैल बेलगाम के दक्षिण दिशा में है, और वहाँ मल्लिकार्जुन का शिव मंदिर स्थित है। (इस अध्याय के पाठ १५ को संदर्भित करें।) ऐसा कहा जाता है कि उस पहाड़ी पर भगवान शिव देवी के साथ रहते थे। साथ ही, भगवान ब्रह्मा सभी देवताओं के साथ वहाँ रहते थे।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)