नृसिंह देखिया ताँरे कैल नति - स्तुति ।
सिद्धवट गेला याहाँ मूर्ति सीतापति ॥17॥
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अनुवाद
अहोवल-नृसिंह विग्रह के दर्शन करके, चैतन्य महाप्रभु ने भगवान की अनेक प्रार्थनाएँ कीं। तत्पश्चात् वे सिद्धवट गए, जहाँ उन्होंने सीतादेवी के स्वामी रामचंद्र के विग्रह के दर्शन किए।
After seeing the Ahowala Nrisimha Deity, Chaitanya Mahaprabhu praised the Lord. He then went to Siddhavata, where he saw the Deity of Ramachandra, the husband of Sitadevi.
तात्पर्य
सिद्धवट, जिसे सिधौटा के नाम से भी जाना जाता है, कुडा पा गाँव से दस मील पूर्व में है। पहले इस जगह को दक्षिणी बनारस के नाम से भी जाना जाता था। वहाँ एक बड़ा बरगद का पेड़ है, इसलिए इसे सिद्धवट के रूप में जाना जाता है। वट का अर्थ है बरगद का पेड़।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥