ऋषभ - पर्वते च लि’ आइला गौरहरि ।
नारायण देखिला ताँहा नति - स्तुति करि’ ॥166॥
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अनुवाद
जब भगवान ऋषभ पर्वत पर पहुंचे, तो उन्होंने भगवान नारायण के मंदिर के दर्शन किए और उन्हें प्रणाम किया तथा विभिन्न प्रार्थनाएँ कीं।
Upon reaching Rishabha Mountain, Mahaprabhu saw the temple of Lord Narayana and offered his salutations. He also offered various praises.
तात्पर्य
ऋषभ पर्वत (आनागडा - मलय - पर्वता) तमिलनाडु के दक्षिणी भाग में मदुरै जिले में मदुरै शहर के बारह मील उत्तर में पड़ता है। यह पर्वत उन पर्वतों में से एक है जो कुटाकाचल के नाम से प्रसिद्ध है। ऋषभ पर्वत के निकट ही वह वन है जहां भगवान ऋषभदेव ने स्वयं को जलाकर भस्म कर लिया था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥