श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.9.102 
प्रभु कहे, - गीता - पाठे तोमाराइ अधिकार ।
तुमि से जानह एइ गीतार अर्थ - सार ॥102॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने ब्राह्मण से कहा, "निःसंदेह, आप भगवद्गीता के पारंगत विद्वान हैं। आप जो कुछ भी जानते हैं, वही भगवद्गीता का वास्तविक अर्थ है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said to the brahmin, "You are undoubtedly the only one qualified to read the Bhagavad Gita. What you know is the true meaning of the Bhagavad Gita."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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