यहाँ भगवान विष्णु द्वारा गजेंद्र हाथी को मगरमच्छ के हमले से बचाने की तुलना श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत के लोगों को वैष्णवों में बदलने से की गई है। जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने दक्षिण भारत का दौरा किया, तो लगभग सभी निवासी बौद्ध, जैन और मायावादी दर्शन के मगरमच्छों के जबड़ों में थे। यहाँ कविराज गोस्वामी कहते हैं कि हालाँकि ये लोग हाथियों की तरह मज़बूत थे, परन्तु वे लगभग मृत्यु के चंगुल में थे क्योंकि उन पर विभिन्न दर्शनों के मगरमच्छों द्वारा हमला किया जा रहा था। हालाँकि, जिस तरह श्री चैतन्य महाप्रभु ने विष्णु के रूप में हाथी गजेंद्र को एक मगरमच्छ के चंगुल से बचाया था, उसी तरह उन्होंने दक्षिण भारत के सभी लोगों को विभिन्न दर्शनों के चंगुल से उन्हें वैष्णवों में बदलकर बचाया था।
