यथा राधा प्रिया विष्णो स्तस्याः कुण्डं प्रियं तथा ।
सर्व - गोपीषु सैवैका विष्णोरत्यन्त - वल्लभा ॥99॥
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अनुवाद
"जिस प्रकार श्रीमति राधारानी श्री कृष्ण को सर्वाधिक प्रिय हैं, उसी प्रकार उनका स्नान-स्थान [राधा-कुण्ड] भी उन्हें प्रिय है। समस्त गोपियों में श्रीमति राधारानी भगवान कृष्ण को सर्वोच्च और अत्यंत प्रिय हैं।"
"Just as Srimati Radharani is extremely dear to Krishna, so too is her bathing place, Radhakunda, dear to him. Srimati Radharani is supreme among all the gopis and is extremely dear to Krishna."
तात्पर्य
यह छंद पद्म पुराण से लिया गया है और लघु-भागवतामृत (२.१.४५) में श्रील रूप गोस्वामी द्वारा शामिल किया गया है। यह आदि-लीला, अध्याय चार, श्लोक 215 में और फिर मध्य-लीला, अध्याय अठारह, श्लोक 8 में भी प्रकट होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥