श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  2.8.96 
प्रभु कहे, - एइ ‘साध्याव धि’ सुनिश्चय ।
कृपा करि’ कह, यदि आगे किछु हय ॥96॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "यह निश्चित रूप से पूर्णता की सीमा है, लेकिन कृपया मुझ पर दया करें और यदि और कुछ हो तो और बोलें।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, “This is certainly the limit of perfection, but please be kind to me and if there is anything else, please tell me.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)