माता-पिता के स्नेह से भरी प्रेममयी भक्ति प्रेम की उन्नत अवस्था है। भाई-बहन के रिश्ते में समानता की भावना होती है, लेकिन जब स्नेह में समानता की यह भावना उन्नत हो जाती है, तो व्यक्ति माता-पिता के प्रेम के स्तर पर पहुँच जाता है। इस संदर्भ में, श्रीमद्-भागवतम (10.8.46) से निम्नलिखित पद का उद्धरण दिया गया है, जिसमें महाराज परीक्षित नंद महाराज और माता यशोदा के कृष्ण के प्रति गहन प्रेम की सराहना करते हैं।
