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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.8.76 
प्रभु कहे, - “एहो उत्तम, आगे कह आ र” ।
राय कहे, “वात्सल्य - प्रेम - सर्व - साध्य - सार” ॥76॥
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, “यह कथन बहुत अच्छा है, लेकिन कृपया इससे भी आगे बढ़ें।”
 
Mahaprabhu said, “This statement is very good, but continue.” Then Ramanand Rai replied, “Fatherly love for God is the state of supreme perfection.”
तात्पर्य
रामानंद राय ने उत्तर देते हुए कहा, " माता-पिता के समान स्नेहपूर्ण भक्ति सबसे श्रेष्ठ परिपूर्ण अवस्था है|

माता-पिता के स्नेह से भरी प्रेममयी भक्ति प्रेम की उन्नत अवस्था है। भाई-बहन के रिश्‍ते में समानता की भावना होती है, लेकिन जब स्‍नेह में समानता की यह भावना उन्‍नत हो जाती है, तो व्‍यक्‍ति माता-पिता के प्रेम के स्‍तर पर पहुँच जाता है। इस संदर्भ में, श्रीमद्-भागवतम (10.8.46) से निम्नलिखित पद का उद्धरण दिया गया है, जिसमें महाराज परीक्षित नंद महाराज और माता यशोदा के कृष्ण के प्रति गहन प्रेम की सराहना करते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)