प्रभु कहे, - “एहो बाह्य, आगे कह आ र” ।
राय कहे, “कृष्णे कर्मार्पण - सर्व - साध्य - सार” ॥59॥
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अनुवाद
भगवान ने उत्तर दिया, "यह बाह्य है। बेहतर होगा कि आप मुझे कोई अन्य उपाय बताएँ।" रामानन्द ने उत्तर दिया, "अपने कर्मों का फल कृष्ण को अर्पित करना ही समस्त सिद्धियों का सार है।" रामानन्द ने उत्तर दिया, "अपने कर्मों का फल कृष्ण को अर्पित करना ही समस्त सिद्धियों का सार है।"
Mahaprabhu said, "This is external. Please tell me some other way." To this Ramanand replied, "The essence of all perfection is to offer the fruits of one's actions to Krishna."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥