प्रभु स्नान - कृत्य करि’ आछेन वसिया ।
एक - भृत्य - सङ्गे राय मिलिला आसिया ॥55॥
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अनुवाद
संध्या स्नान समाप्त करने के बाद, श्री चैतन्य महाप्रभु बैठ गए और रामानंद राय के आने की प्रतीक्षा करने लगे। तभी रामानंद राय एक सेवक के साथ उनसे मिलने आए।
After taking his evening bath, Sri Chaitanya Mahaprabhu sat down and waited for Ramanand Rai to arrive. Then Ramanand Rai came to meet him with a servant.
तात्पर्य
एक वैष्णव जो आध्यात्मिक ज्ञान में उन्नत माना जाता है - चाहे वह गृहस्थ हो या सन्यासी - उसे दिन में तीन बार स्नान करना चाहिए: सुबह, दोपहर और शाम। जब कोई भगवान की सेवा में लगा रहता है, तो उसे विशेष रूप से पद्म पुराण के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए और नियमित स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद, उसे बारह तिलकों से अपने शरीर को सजाना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥