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अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने ब्राह्मण को भक्त जानकर निमंत्रण स्वीकार कर लिया और हल्के से मुस्कुराते हुए रामानन्द राय से इस प्रकार कहा।
Knowing that Brahmin to be a devotee, Mahaprabhu accepted his invitation and smiling a little, he spoke to Ramanand Rai as follows.
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु नें वैष्णव ब्राह्मण के आमंत्रण को स्वीकार किया, जबकि नियमों और संस्कृति का निर्वाह करने वाले ब्राह्मण होने पर भी यदि वे भगवान् के भक्त या श्री चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी नहीं हैं तो उनके आमंत्रण को स्वीकार नहीं करना चाहिए। इस समय लोग इतने पतित हो गए हैं कि वे वैष्णव सिद्धांतों की बात छोड़िए, वैदिक सिद्धांतों का भी पालन नहीं करते। वे अपनी इच्छा अनुसार कुछ भी खाते हैं, इसलिए कृष्ण भावनाभावित आंदोलन के सदस्यों को एक आमंत्रण स्वीकार करने से पहले सतर्क रहना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥