श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 309
 
 
श्लोक  2.8.309 
अलौकिक लीला एइ परम निगूढ़ ।
विश्वासे पाइये, तर्के हय बहु - दूर ॥309॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का यह भाग अत्यंत गोपनीय है। श्रद्धा से ही शीघ्र लाभ प्राप्त होता है; अन्यथा तर्क-वितर्क करने से मनुष्य सदैव दूर ही रहेगा।
 
This part of Sri Chaitanya Mahaprabhu's pastimes is extremely confidential. One can immediately benefit from it only through faith; otherwise, argument will deprive one of it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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