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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 294
 
 
श्लोक  2.8.294 
तामा, काँसा, रूपा, सोना, रत्न - चिन्तामणि ।
केह यदि काहाँ पोता पाय एक - खानि ॥294॥
 
 
अनुवाद
दरअसल, ये वार्तालाप एक बड़ी खदान की तरह हैं, जहां एक ही स्थान से सभी प्रकार की धातुएं - तांबा, बेल धातु, चांदी और सोना - निकाली जा सकती हैं, साथ ही सभी धातुओं का आधार, पारस पत्थर भी निकाला जा सकता है।
 
In fact, these talks are like a huge mine, where all types of metals can be extracted from one place, such as copper, bronze, silver, gold and the Chintamani stone, the basis of all other metals.
तात्पर्य
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर रामानंद राय और श्री चैतन्य महाप्रभु के बीच हुई बातचीत का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है। रामानंद राय ने श्री चैतन्य महाप्रभु के पाँच प्रश्नों का उत्तर दिया, और ये प्रश्न एवं उनके उत्तर पद 57-67 में दर्ज हैं। पहला उत्तर तांबे, दूसरा एक बेहतर धातु कलई के समान, तीसरा एक और बेहतर धातु चांदी के समान, और चौथा सभी धातुओं में श्रेष्ठ सोने के समान है। लेकिन पाँचवाँ उत्तर सबसे मूल्यवान रत्न कसौटी के समान है क्योंकि यह निष्कलंक भक्ति से संबंधित है, जो भक्ति जीवन का अंतिम लक्ष्य है, और पिछले चार अधीनस्थ उत्तरों को प्रकाशित करता है।

श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर कहते हैं कि वृजाभूमि में यमुना नदी है, जिसके किनारे रेतीले हैं। वहाँ कदंब के पेड़, गायें, कृष्ण की लाठियाँ जिनके साथ वे गायों को चराते हैं, और कृष्ण की बाँसुरी है। ये सभी शांत-रस से संबंधित हैं, जो भक्ति सेवा में तटस्थता का भाव है। वहाँ कृष्ण के प्रत्यक्ष सेवक भी हैं, जैसे चित्रक, पत्रक और रक्तक, और ये सेवा के अवतार हैं जो दासता के भाव से संबंधित है। श्रीदामा और सुदामा जैसे मित्र भी हैं, जो भाईचारे में सेवा का अवतार हैं। नंद महाराज और माता यशोदा माता-पिता प्रेम के अवतार हैं। इन सबसे ऊपर श्रीमती राधारानी और उनकी सहायक गोपियाँ ललिता, विशाखा और अन्य हैं, जो वैवाहिक प्रेम का अवतार हैं। इस तरह पाँचों भाव - शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य और माधुर्य - वृजाभूमि में सदा बने रहते हैं। उनकी तुलना क्रमशः तांबे, कलई, चांदी, सोना और कसौटी के साथ की जाती है, जो सभी धातुओं का आधार है। इसलिए श्रील कावीराज गोस्वामी वृंदावन, वृजाभूमि में सदा विद्यमान एक खदान का उल्लेख करते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)