नाहं प्रकाशः सर्वस्य योग-माया-समावृताः
मूढोऽयं नाभिजानाति लोक मामजम अव्ययम
"मैं मूर्ख और अविवेकी लोगों के सामने कभी प्रकट नहीं होता। उनके लिए मैं अपनी आंतरिक शक्ति [योगमाया] से ढका हुआ हूं, इसलिए वे मुझे नहीं जानते, जो अजन्मे और अचूक हूं।"
भगवान हमेशा सभी के सामने प्रकट न होने के अधिकार का उपयोग करते हैं। हालाँकि, भक्त हमेशा भगवान की सेवा में लगे रहते हैं, हरे कृष्ण मंत्र का जाप करके और महाप्रसाद का स्वाद लेकर अपनी जीभ से सेवा करते हैं। धीरे-धीरे निष्ठावान भक्त भगवान को प्रसन्न करते हैं और भगवान स्वयं को प्रकट करते हैं। कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत प्रयासों से भगवान को नहीं देख सकता है। बल्कि, जब भगवान भक्त की सेवा से प्रसन्न होते हैं, तो वे स्वयं को प्रकट करते हैं।
