श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 280
 
 
श्लोक  2.8.280 
निज - गूढ़ - कार्य तोमार - प्रेम आस्वादन ।
आनुषङ्गे प्रेम - मय कैले त्रिभुवन ॥280॥
 
 
अनुवाद
"मेरे प्रिय प्रभु, आप अपने निजी उद्देश्य से भगवान चैतन्य के इस अवतार में अवतरित हुए हैं। आप अपने आध्यात्मिक आनंद का स्वाद लेने आए हैं, और साथ ही आप भगवद् प्रेम का परमानंद फैलाकर पूरे विश्व को परिवर्तित कर रहे हैं।
 
"O Lord, You have appeared in this incarnation as Chaitanya Mahaprabhu for personal reasons. You have come to enjoy Your own spiritual bliss and at the same time transform the entire world by spreading love for God."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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