प्रापंचिकतया बुद्धया हरि-संबंधि-वस्तुनः
मुमुक्षुभिः परित्यागो वैराग्यं फल्रु कथ्यते
(भक्ति-रसामृत-सिन्धु 1.2.126)
परम भक्त किसी भी चीज को कृष्ण से असंबद्ध नहीं देखता। मायावादी दार्शनिकों के विपरीत, एक भक्त भौतिक दुनिया को मिथ्या नहीं मानता, क्योंकि वह जानता है कि भौतिक दुनिया में हर चीज कृष्ण से जुड़ी हुई है। एक भक्त जानता है कि प्रभु की सेवा में हर चीज का उपयोग कैसे करना है, और यह महाभागवत की विशेषता है। गोपियों ने देखा कि पौधे, बेलें और जंगल के पेड़ फलों और फूलों से लदे हुए हैं और कृष्ण की सेवा के लिए तैयार हैं। इस तरह उन्हें तुरंत उनके पूजनीय स्वामी श्री कृष्ण की याद आ गई। उन्होंने केवल पौधों, बेलों और पेड़ों को उस तरह नहीं देखा जैसे कोई सांसारिक व्यक्ति उन्हें देखता है।
