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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 253
 
 
श्लोक  2.8.253 
‘ध्येय - मध्ये जीवे र कर्तव्य कोन्ध्यान ?’ ।
‘राधा - कृष्ण - पदाम्बुज - ध्यान - प्रधान’ ॥253॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने आगे पूछा, "कई प्रकार के ध्यानों में से, सभी जीवों के लिए कौन सा ध्यान आवश्यक है?"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu further asked, “Of all the types of meditation, which one is most essential for living beings?” Srila Ramanand Rai replied, “The primary duty of every living being is to meditate on the lotus feet of Radha Krishna.”
तात्पर्य
श्रील रामानन्द राय ने उत्तर दिया, "प्रत्येक जीवित प्राणी का मुख्य कर्तव्य राधा और कृष्ण के चरण-कमलों का ध्यान करना है।"

श्रीमद्-भागवतम (1.2.14) में कहा गया है:

तस्माद एकेन मनसा भगवान् सात्वतां पतिः

श्रुतव्यः कीर्तितव्यश्च ध्येयः पूज्यश्च नित्यदा

सूत गोस्वामी ने शौनक के नेतृत्व वाले ऋषियों को उत्तर दिया, "हर किसी को भगवान के कृत्यों को बहुत ध्यान से सुनना चाहिए। किसी को उनकी गतिविधियों का महिमामंडन करना चाहिए और उन पर नियमित रूप से ध्यान करना चाहिए।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)