श्रीमद्-भागवतम (1.2.14) में कहा गया है:
तस्माद एकेन मनसा भगवान् सात्वतां पतिः
श्रुतव्यः कीर्तितव्यश्च ध्येयः पूज्यश्च नित्यदा
सूत गोस्वामी ने शौनक के नेतृत्व वाले ऋषियों को उत्तर दिया, "हर किसी को भगवान के कृत्यों को बहुत ध्यान से सुनना चाहिए। किसी को उनकी गतिविधियों का महिमामंडन करना चाहिए और उन पर नियमित रूप से ध्यान करना चाहिए।"
