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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 249
 
 
श्लोक  2.8.249 
‘मुक्त - मध्ये कोन्जीव मुक्त करि’ मानि?’ ।
‘कृष्ण - प्रेम याँर, सेइ मुक्त - शिरोम णि’ ॥249॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने तब पूछा, "सभी मुक्त पुरुषों में से, किसे सबसे महान माना जाना चाहिए?"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu asked, “Who among all liberated souls is considered the greatest?” Ramanand Rai replied, “He who is filled with love for Krishna has attained the highest liberation.”
तात्पर्य
रामानंद राय ने उत्तर दिया, "जिसके मन में कृष्ण के लिए प्रेम है उसने सर्वोच्च मुक्ति प्राप्त कर ली है।"

श्रीमद्-भागवतम (6.14.5) में कहा गया है:

मुक्तानाम् अपि सिद्धानाम् नारायण-परायणः

सु-दुर्लभः प्रशान्त-आत्मा कोटिष्व अपि महा-मुने

"हे महामुनि, करोड़ों मुक्त पुरुषों और करोड़ों सिद्ध पुरुषों में से भगवान नारायण का भक्त बहुत ही दुर्लभ है। वास्तव में, वह सबसे परिपूर्ण और शांत मन वाला व्यक्ति होता है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)