श्रीमद्-भागवतम (6.14.5) में कहा गया है:
मुक्तानाम् अपि सिद्धानाम् नारायण-परायणः
सु-दुर्लभः प्रशान्त-आत्मा कोटिष्व अपि महा-मुने
"हे महामुनि, करोड़ों मुक्त पुरुषों और करोड़ों सिद्ध पुरुषों में से भगवान नारायण का भक्त बहुत ही दुर्लभ है। वास्तव में, वह सबसे परिपूर्ण और शांत मन वाला व्यक्ति होता है।"
