श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 248
 
 
श्लोक  2.8.248 
‘दुःख - मध्ये कोन दुःख हय गुरुतर?’ ।
‘कृष्ण - भक्त - विरह विना दुःख नाहि देखि पर’ ॥248॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने पूछा, "सभी प्रकार के कष्टों में सबसे अधिक दुःखदायी क्या है?"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu asked, “Of all the sorrows, which one is the most painful?” Sri Ramanand Rai replied, “To my knowledge, there is no sorrow more unbearable than the separation from a devotee of Krishna.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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