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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 247
 
 
श्लोक  2.8.247 
‘सम्पत्तिर मध्ये जीवेर कोन्सम्पत्ति गणि ?’ ।
‘राधा - कृष्णे प्रेम याँर, सेइ बड़ धनी’ ॥247॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने पूछा, "अनेक पूँजीपतियों में, जिनके पास अपार धन है, सर्वोच्च कौन है?"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu asked, “Who is the greatest among the wealthy?” Ramanand Rai replied, “He who is the greatest possessor of the love of Radha and Krishna is the greatest possessor.”
तात्पर्य
रामानन्द राय ने जवाब दिया, "राधा और कृष्ण के प्रति प्रेम में जो सबसे अमीर है, वह सबसे बड़ा पूंजीपति है।"

इस भौतिक दुनिया में हर कोई इंद्रियों को संतुष्ट करने के लिए धन हासिल करने का प्रयास कर रहा है। वास्तव में भौतिक संपत्ति हासिल करने और उन्हें बनाए रखने के अलावा किसी को किसी चीज की परवाह नहीं है। आमतौर पर धनी लोगों को इस भौतिक दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता है, लेकिन जब हम धन के भौतिक व्यक्ति की तुलना राधा और कृष्ण की भक्ति सेवा में धनी से करते हैं, तो बाद वाले को सबसे महान पूंजीपति पाया जाता है। श्रीमद्- भागवतम (10.39.2) के अनुसार:

किम अलाभ्यं भगवति प्रसन्ने श्री-निकेतने

तथापि तत्-परा राजन् न हि वाञ्छन्ति किञ्चना

"भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए क्या मुश्किल है, जो भाग्य की देवी के आश्रय हैं? यद्यपि ऐसे भक्त कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं, हे राजा, वे कुछ भी नहीं चाहते हैं।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)