इस भौतिक दुनिया में हर कोई इंद्रियों को संतुष्ट करने के लिए धन हासिल करने का प्रयास कर रहा है। वास्तव में भौतिक संपत्ति हासिल करने और उन्हें बनाए रखने के अलावा किसी को किसी चीज की परवाह नहीं है। आमतौर पर धनी लोगों को इस भौतिक दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता है, लेकिन जब हम धन के भौतिक व्यक्ति की तुलना राधा और कृष्ण की भक्ति सेवा में धनी से करते हैं, तो बाद वाले को सबसे महान पूंजीपति पाया जाता है। श्रीमद्- भागवतम (10.39.2) के अनुसार:
किम अलाभ्यं भगवति प्रसन्ने श्री-निकेतने
तथापि तत्-परा राजन् न हि वाञ्छन्ति किञ्चना
"भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए क्या मुश्किल है, जो भाग्य की देवी के आश्रय हैं? यद्यपि ऐसे भक्त कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं, हे राजा, वे कुछ भी नहीं चाहते हैं।"
