श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 241
 
 
श्लोक  2.8.241 
नीलाचले तुमि - आमि थाकिब एक - सङ्गे ।
सुखे गोङाइब काल कृष्ण - कथा - रङ्गे ॥241॥
 
 
अनुवाद
"तुम और मैं जगन्नाथ पुरी में साथ-साथ रहेंगे। हम कृष्ण और उनकी लीलाओं पर चर्चा करते हुए आनंदपूर्वक अपना समय साथ-साथ बिताएँगे।"
 
"You and I will both be together in Jagannatha Puri. We will spend our time together happily discussing Krishna and his pastimes."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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