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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 239
 
 
श्लोक  2.8.239 
यैछे शुनिलुँ, तैछे देखिलुँ तोमार महिमा ।
राधा - कृष्ण - प्रेमरस - ज्ञानेर तुमि सीमा ॥239॥
 
 
अनुवाद
"अब जब मैंने आपकी महिमा देख ली है, तो आपके बारे में जो कुछ मैंने सुना था, वह सत्य हो गया है। जहाँ तक राधा और कृष्ण की प्रेममयी लीलाओं का प्रश्न है, आप ज्ञान की पराकाष्ठा हैं।"
 
"Just as I had heard of you, I have also seen your greatness. As far as the love-play of Radha and Krishna is concerned, you are the pinnacle of knowledge."
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु ने पाया कि रामानन्द राय राधा और कृष्ण के प्रेम संबंधों के आध्यात्मिक ज्ञान में सबसे बड़े अधिकारी हैं। इस छंद में भगवान वास्तव में बताते हैं कि रामानन्द राय इस ज्ञान की सीमा थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)