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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.8.23 
स्वाभाविक प्रेम दोंहार उदय करिला ।
दुँहा आलिङ्गिया दुँहे भूमिते पड़िला ॥23॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों में एक दूसरे के प्रति स्वाभाविक प्रेम जागृत हो गया और वे गले लगकर जमीन पर गिर पड़े।
 
Both of them felt natural love for each other, they embraced each other and fell on the ground.
तात्पर्य
श्रील रामानंद राय गोपी विशाखा के अवतार थे। चूंकि श्री चैतन्य महाप्रभु स्वयं भगवान कृष्ण थे, इसलिए विशाखा और कृष्ण के बीच स्वाभाविक रूप से प्रेम जागृत हुआ था। श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु श्रीमती राधारानी और कृष्ण का संयोग हैं, और गोपी विशाखा एक प्रमुख गोपी हैं जो श्रीमती राधारानी की सहायता करती हैं। इस प्रकार रामानंद राय और श्री चैतन्य महाप्रभु के बीच स्वाभाविक प्रेम जागा और उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)