ताहाते दृष्टान्त - उपनिषद्श्रुति - गण ।
राग - मार्गे भ जि’ पाइल व्रजेन्द्र - नन्दन ॥223॥
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अनुवाद
"उपनिषदों के प्रतिनिधि वे ऋषिगण इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। सहज प्रेम के मार्ग पर भगवान की आराधना करके, उन्होंने नंद महाराज के पुत्र व्रजेंद्रनंदन के चरणकमलों को प्राप्त किया।"
"The saints who represent the Upanishads are shining examples of this. By worshipping the Lord on the path of passionate love, they attained the lotus feet of Vrajendranandana, son of Nanda Maharaja."
तात्पर्य
गोलोक वृन्दावन ग्रह पर, कृष्ण के नौकर राक्तक और पत्रक के अधीन हैं। कृष्ण के मित्र श्रीदामा, सुबल और अन्य के अधीन हैं। वहां वृद्ध गोपियाँ और ग्वाले भी हैं, जिनके प्रमुख नंद महाराज, माता यशोदा और अन्य हैं। ये सभी व्यक्तित्व कष्ण के लिए अपने विशिष्ट लगाव के अनुसार सदा प्रेम से भगवान की सेवा में लगे रहते हैं। जो लोग भगवान की सीधे सेवा करने के लिए घर वापस आना चाहते हैं, वे एक नौकर, मित्र, पिता या माता के रूप में कृष्ण के प्रति आकर्षित हो सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन के दौरान लगातार एक विशेष उन्माद में कृष्ण की सेवा करता है, तो भौतिक शरीर को त्यागने पर वह कृष्ण के लिए अपने विशेष लगाव के संदर्भ में सेवा करने के लिए उपयुक्त आध्यात्मिक शरीर प्राप्त करता है। कोई नौकर, मित्र, पिता या माता के रूप में सेवा कर सकता है। उसी तरह, जो लोग कृष्ण की कामुक प्रेम से सेवा करना चाहते हैं, वे गोपियों के मार्गदर्शन में शरीर प्राप्त कर सकते हैं। इस संदर्भ में, सबसे ज्वलंत उदाहरण उन संत व्यक्तित्वों द्वारा प्रदान किया जाता है जिन्हें श्रुति के रूप में जाना जाता है, जो उपनिषदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्रुतियों ने समझा कि कृष्ण की सेवा और गोपियों के पद चिन्हों का अनुसरण किए बिना ईश्वर के राज्य में प्रवेश करने और कामुक प्रेम के भाव में कृष्ण की सेवा करने की कोई संभावना नहीं होगी। इसलिए वे कृष्ण के प्रति सहज प्रेममय सेवा में लगे रहे और गोपियों के पद चिन्हों का अनुसरण किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥