श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 196
 
 
श्लोक  2.8.196 
प्रभु कहे, - ‘साध्य - वस्तुर अवधि’ एइ हय ।
तोमार प्रसादे इहा जानिलुँ निश्चय ॥196॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने श्री रामानन्द राय द्वारा गाए गए इन श्लोकों की पुष्टि करते हुए कहा, "यह मानव जीवन के लक्ष्य की सीमा है। केवल आपकी कृपा से ही मैं इसे निर्णायक रूप से समझ पाया हूँ।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu confirmed these verses recited by Sri Ramanand Rai by saying, "This is the limit of the goal of human life. Only by your grace have I been able to understand this with certainty."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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