श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 193
 
 
श्लोक  2.8.193 
एत ब लि’ आपन - कृत गीत एक गाहिल ।
प्रेमे प्रभु स्व - हस्ते ताँर मुख आच्छादिल ॥193॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर रामानन्द राय ने अपना रचा हुआ गीत गाना आरम्भ किया, किन्तु भगवान के प्रेम के उन्माद में श्री चैतन्य महाप्रभु ने तुरन्त ही अपने हाथ से रामानन्द का मुख ढक दिया।
 
Saying this, Ramanand Rai started singing a song of his own composition, but Sri Chaitanya Mahaprabhu, overcome with emotion, immediately closed Ramanand Rai's mouth with his hand.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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