श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.8.189 
रात्रि - दिन कुञ्जे क्रीड़ा करे राधा - सङ्गे ।
कैशोर वयस सफल कैल क्रीड़ा - रङ्गे ॥189॥
 
 
अनुवाद
"भगवान श्रीकृष्ण दिन-रात वृन्दावन की झाड़ियों में श्रीमती राधारानी की संगति का आनंद लेते हैं। इस प्रकार उनकी पूर्व-यौवनावस्था श्रीमती राधारानी के साथ उनके संबंधों के माध्यम से पूर्ण होती है।"
 
"Lord Krishna plays with Srimati Radharani for seven days and nights in the groves of Vrindavan. Thus, his adolescence is spent playing with Radharani."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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