प्रभु कहे, - जानि लुँ कृष्ण - राधा - प्रेम - तत्त्व ।
शुनिते चाहिये दुँहार विलास - महत्त्व ॥186॥
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "अब मुझे राधा और कृष्ण के प्रेम संबंधों का सत्य समझ में आ गया है। फिर भी, मैं अब भी यह सुनना चाहता हूँ कि वे दोनों किस प्रकार इस प्रेम का आनंद लेते हैं।"
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, “Now I can understand the essence of love between Radha and Krishna.