श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  2.8.181 
कृष्णेर विशुद्ध - प्रेम - रत्नेर आकर ।
अनुपम - गुणगण - पूर्ण कलेवर ॥181॥
 
 
अनुवाद
"श्रीमती राधारानी कृष्ण प्रेम के बहुमूल्य रत्नों से भरी हुई खान हैं। उनका दिव्य शरीर अद्वितीय आध्यात्मिक गुणों से परिपूर्ण है।"
 
"Srimati Radharani is like a mine full of priceless gems of Krishna's love. Her transcendental body is filled with incomparable spiritual qualities."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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