श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  2.8.148 
आपन - माधुर्ये हरे आपनार मन ।
आपना आपनि चाहे करिते आलिङ्गन ॥148॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण का माधुर्य इतना आकर्षक है कि वह उनका मन ही हर लेता है। इसलिए वे स्वयं को भी गले लगाना चाहते हैं।
 
"Lord Krishna's sweetness is so captivating that it steals his own heart. He even wants to embrace himself in this way."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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