Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 146
 
 
श्लोक  2.8.146 
द्विजात्मजा मे युवयोर्दिदृक्षुणा मयोपनीता भुवि धर्म - गुप्तये ।
कलावतीर्णाववनेर्भरासुरान् हत्वेह भूयस्त्वरयेतमन्ति मे ॥146॥
 
 
अनुवाद
[कृष्ण और अर्जुन को संबोधित करते हुए, भगवान महाविष्णु (महापुरुष) ने कहा:] 'मैं आप दोनों के दर्शन करना चाहता था, इसलिए मैं ब्राह्मण पुत्रों को यहाँ लाया हूँ। आप दोनों ही धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भौतिक जगत में अवतरित हुए हैं, और आप दोनों अपनी समस्त शक्तियों के साथ यहाँ प्रकट हुए हैं। सभी राक्षसों का वध करके, कृपया शीघ्र ही वैकुंठलोक में लौट जाएँ।'
 
“[Addressing Krishna and Arjuna, Mahavishnu (the great man) said:] ‘I wanted to see you both, so I have brought you sons of brahmins here. You have appeared with all your powers to establish Dharma in this material world. Please return to the spiritual world immediately after killing all the demons.’
तात्पर्य
यह श्रीमद्भागवतम (10.89.58) का एक उद्धरण है जो कृष्ण के अर्जुन को भौतिक जगत से परे ले जाने के प्रयास के बारे में है जब अर्जुन एक ब्राह्मण के पुत्रों की तलाश कर रहा था।

भगवान महाविष्णु, जो इस भौतिक जगत से परे स्थित हैं, भी कृष्ण के शारीरिक रूप से आकर्षित हुए थे। महाविष्णु ने वास्तव में द्वारका में ब्राह्मण के पुत्रों को चुरा लिया था ताकि कृष्ण और अर्जुन उनके दर्शन के लिए आएँ। यह श्लोक यह बताने के लिए उद्धृत किया गया है कि कृष्ण इतने आकर्षक हैं कि उन्होंने महाविष्णु को भी आकर्षित किया।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)