‘सन्न्या सी’ बलिया मोरे ना करिह वञ्चन ।
कृष्ण - राधा - तत्त्व क हि’ पूर्ण कर मन ॥129॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने आगे कहा, "कृपया मुझे विद्वान संन्यासी समझकर मुझे धोखा देने का प्रयास न करें। कृपया राधा और कृष्ण के सत्य का वर्णन करके मेरे मन को संतुष्ट करें।"
Sri Chaitanya Mahaprabhu continued, "Do not try to deceive me by thinking I am a learned sannyasi. Please satisfy my mind by describing the essence of Radha and Krishna."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)