Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु, जिन्हें गौरांग कहा जाता है, भक्ति के समस्त निर्णायक ज्ञान के सागर हैं। उन्होंने श्री रामानन्द राय को शक्ति प्रदान की, जिन्हें भक्ति के बादल के समान कहा जा सकता है। यह बादल भक्ति के समस्त निर्णायक अर्थों के जल से परिपूर्ण था और सागर द्वारा उसे श्री चैतन्य महाप्रभु के सागर पर इस जल को फैलाने की शक्ति प्रदान की गई। इस प्रकार चैतन्य महाप्रभु का सागर शुद्ध भक्ति के ज्ञान रत्नों से परिपूर्ण हो गया।
Sri Chaitanya Mahaprabhu, also known as Gauranga, is the ocean of all theoretical knowledge related to devotion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥