vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा
»
श्लोक 92
श्लोक
2.7.92
मूर्च्छित हञा सबे भूमिते पड़िला ।
ताँहा - सबा पाने प्रभु फिरि’ ना चाहिला ॥92॥
अनुवाद
यद्यपि वे सभी बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े, फिर भी प्रभु ने उन्हें देखने के लिए मुड़कर नहीं देखा, बल्कि आगे बढ़ गये।
Although they all fell unconscious on the ground, Mahaprabhu did not turn back to look at them – he kept moving forward.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×