श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  2.7.90 
एइ - रूपे सेइ ठाञि भक्त - गण - सङ्गे ।
सेइ रात्रि गोङाइला कृष्ण - कथा - रङ्गे ॥90॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने वहाँ रात्रि बिताई और अपने भक्तों के साथ बड़े आनंद से भगवान कृष्ण की लीलाओं पर चर्चा की।
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu spent the night there, and discussed the pastimes of Lord Krishna with his devotees with great joy.
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