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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.7.72 
महानुभावेर चित्तेर स्वभाव एइ हय ।
पुष्प - सम कोमल, कठिन व ज्र - मय ॥72॥
 
 
अनुवाद
एक असाधारण व्यक्तित्व के मन का स्वभाव ऐसा ही होता है। कभी यह फूल की तरह कोमल होता है, तो कभी वज्र की तरह कठोर।
 
Such is the nature of the mind of a great man. Sometimes it is as soft as a flower, and sometimes as hard as a thunderbolt.
तात्पर्य
एक महान व्यक्तित्व के व्यवहार में एक फूल की कोमलता और एक वज्र की कठोरता मेल खाती है। उत्तर-राम-चरित (2.7) का निम्न उद्धरण इस व्यवहार की व्याख्या करता है। कोई मध्य-लीला, तृतीय अध्याय, पद्य 212 को भी देख सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)