श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.7.48 
शिरे वज़ पड़े यदि, पुत्र मरि’ याय ।
ताहा सहि, तोमार विच्छेद सहन ना याय ॥48॥
 
 
अनुवाद
"मेरे सिर पर वज्र गिरे या मेरा पुत्र मर जाए, तो मैं सहन कर लूँगा। परन्तु आपसे वियोग का दुःख मैं सहन नहीं कर सकता।"
 
"If a thunderbolt strikes my head or my son dies, I can bear it. But I cannot bear the pain of your separation."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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