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अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा
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श्लोक 44
श्लोक
2.7.44
सन्न्यास करि’ विश्वरूप गियाछे दक्षिणे ।
अवश्य करिब आमि ताँर अन्वेषणे ॥44॥
अनुवाद
"मेरे बड़े भाई विश्वरूप संन्यास लेकर दक्षिण भारत चले गए हैं। अब मुझे उनकी खोज में जाना होगा।"
"My elder brother, Visvarupa, has taken sanyas (renunciation) and gone to South India. Now I must go in search of him."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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