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श्लोक 2.7.152  |
श्रद्धा क रि’ एइ लीला ये करे श्रवण ।
अचिराते मिलये तारे चैतन्य - चरण ॥152॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य श्री चैतन्य महाप्रभु की इन लीलाओं को बड़ी श्रद्धा से सुनता है, वह शीघ्र ही भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणकमलों को प्राप्त कर लेता है। |
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| Whoever listens to these pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu with utmost devotion will immediately attain His lotus feet. |
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