श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.7.113 
एइ - मत याइते याइते गेला कूर्म - स्थाने ।
कूर्म देखि’ कैल ताँरे स्तवन - प्रणामे ॥113॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु कूर्मक्षेत्र नामक पवित्र स्थान पर आये, तो उन्होंने विग्रह के दर्शन किये तथा प्रार्थना और वंदना की।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu reached the pilgrimage site of Kurmakshetra, he saw the Deity, praised it and offered his obeisances.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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