श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  2.6.89 
आचार्य कहे , - “वस्तु - विषये हय वस्तु - ज्ञान ।
वस्तु - तत्त्व - ज्ञान हय कृपाते प्रमाण” ॥89॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ आचार्य ने उत्तर दिया, "परम सत्य का ज्ञान, परम भगवान की दया का प्रमाण है।"
 
Gopinath Acharya replied, “Knowledge of the ultimate truth that brings the greatest welfare is the proof of God's grace.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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