श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.6.8 
शिष्य पड़िछा - द्वारा प्रभु निल वहाञा ।
घरे आ नि’ पवित्र स्थाने राखिल शो याञा ॥8॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान चैतन्य महाप्रभु अचेत थे, तब सार्वभौम भट्टाचार्य ने पहरेदार और कुछ शिष्यों की सहायता से उन्हें अपने घर ले जाकर एक अत्यंत पवित्र कक्ष में लिटा दिया।
 
Sarvabhauma Bhattacharya, with the help of security guards and some disciples, brought Sri Chaitanya Mahaprabhu to his house in an unconscious state and laid him down in a very sacred place.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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