वदन्ति तत् तत्त्व-विद: तत्त्वं यज ज्ञानं अद्वयम
ब्रह्मेति परमात्मति भगवान इति शब्द्यते
"जो अद्वैत परम सत्य के ज्ञान में हैं, वे स्पष्ट रूप से जानते हैं कि ब्रह्म क्या है, परमात्मा क्या है, और भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व क्या है।" भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व षड-ऐश्वर्य-पूर्ण है, जो छह ऐश्वर्यों से पूर्ण है। गोपीनाथ आचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि उन सभी छह ऐश्वर्यों का पूर्ण रूप से श्री चैतन्य महाप्रभु में अस्तित्व था।
