श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  2.6.74 
भट्टाचार्य कहे , - ‘इँहार प्रौढ़ यौवन ।
केमते सन्न्यास - धर्म हइ बे रक्षण’ ॥74॥
 
 
अनुवाद
भट्टाचार्य ने पूछा, "श्री चैतन्य महाप्रभु अभी पूर्ण युवावस्था में हैं। वे संन्यास के सिद्धांतों का पालन कैसे कर सकते हैं?"
 
Bhattacharya asked, "Sri Chaitanya Mahaprabhu is in his prime. How will he be able to follow the rules of renunciation?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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