श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.6.51 
गोपीनाथाचार्य कहे , - नवद्वीपे घर ।
‘जगन्नाथ’ - नाम, पदवी - ‘मिश्र पुरन्दर’ ॥51॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ आचार्य ने उत्तर दिया, "जगन्नाथ नाम का एक व्यक्ति था, जो नवद्वीप का निवासी था, और जिसका उपनाम मिश्र पुरंदर था।
 
Gopinatha Acharya replied, “There was a resident in Navadvipa named Jagannatha, whose surname was Mishra Purandara.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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